Raid on medicine shops: छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया ये जुमला आपने ही नहीं पूरे देश ने सुना है, लेकिन पिछले दो दशक में अपराध और नशे के सौदागरों ने जिस तरह छत्तीसगढ़ पर शिकंजा कसा है, उससे एक बेहतर राज्य की तस्वीर बदलने लगी है। इसका ताजा उदाहरण बिलासपुर से सामने आया है। बिलासपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने नशे पर नकेल कसने की कवायद की। टीम में शामिल 60 अफसरों ने अलग-अलग पंद्रह टोलियां बनाई। उन्होंने शहर के करीब 45 मेडिकल स्टोर्स पर दबिश दी। खुलासा चौंकाने वाला हुआ, पंद्रह से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस सस्पेंड किए गए और तीन मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस बर्खास्त कर दिए गए। नियमों को दरकिनार कर प्रतिबंधित और नशीली दवाइयों की खरीद-बिक्री करने को लेकर की गई इस कार्रवाई के परिणाम ने छत्तीसगढ़ को पंजाब के करीब लाकर खड़ा कर दिया है।


जरा गौर कीजिए छापेमारी के दौरान दुकानों में टेस्ट परचेस किया गया। मंगला इलाके में एक मेडिकल स्टोर में प्रिस्किपशन के बगैर नारकोटिक्स की दवाइयां बेची जा रही थी। महाराणा प्रताप चौक, पुराना बस स्टैंड, चिंगराजपारा, अशोक नगर, मोपका, सकरी, जरहाभाटा इलाके में भी दबिश दी गई। जहां दवा दुकान की आड़ में नशे के कारोबार का खुलासा हुआ। साफ जाहिर है कि दवा दुकानों की आड़ लेकर नशे के सफेदपोश सौदागर चंद रुपयों की खातिर किस तरह आबादी की बर्बादी कर रहे हैं। बात चाहे प्रदेश की राजधानी की हो या न्यायधानी की ड्रग माफिया का सिंडिकेट हर जगह काम कर रहा है। कार्रवाई की सराहना की जाएगी , पर चंद सवालों के जवाब भी जिम्मेदारों को ही देना होगा।बड़ा सवाल ये है कि कार्रवाई आखिर अंतराल के बाद चंद चुनिंदा लोगों के खिलाफ और समय-समय पर क्यों होती है?

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