माननीय, क्या छत्तीसगढ़ का नाम आने वाले दिनों में अपराधगढ़ होगा ? कॉमन मैन को सियासत से मतलब नहीं, आमजन की हैसियत से सवाल पूछ रहा हूं मैं? … दुर्ग में मड़ेसरा के बोथरा पेट्रोल पंप पर 4 नकाबपोश बदमाशों ने चाकू और एयर गन के सहारे 28 हजार नगद और मोबाइल लूट की वारदात को अंजाम दिया है। मसला सिर्फ इस लूट की वारदात का नहीं है। इस तरह की वारदात रोजाना दर्ज की जा रही है। दुर्ग और रायपुर को अब अलग आंकना मुमकिन नहीं। राजधानी में गुंडई का आलम ये है कि रात को 10 बजे के बाद किसी भी सुनसान इलाके में सफर करना संभव नहीं। हो सकता है कि तलवारबाज, दारूबाज, चाकूबाज, लुटेरे आपका इंतजार कर रहे हों। खाकी की कवायद से एक आम आदमी का वास्ता नहीं, आमजन सुरक्षित घर पहुंचे , ये उसकी चाहत है। आप परेड कराइए बदमाशों की, ये सुर्खियां बन सकती समाचार पत्रों की, या न्यूज चैनल की। जरा सोचिए जनाब इसके बावजूद जब रात को एक शख्स लूट का शिकार बन जाए , तो उस शख्स को आपकी कवायद से क्या लेना-देना?


साहेब ये एक बाप, भाई, पिता, पति की इल्तजा है। जिस अपराधमुक्त छत्तीसगढ़ का भरोसा आपने दिलाया था , आम आदमी का वह सपना साकार करिए। कहर पत्रकार पर नहीं अपराधी पर ढा दीजिए। एक आंचलिक लोकोक्ति है, बंदर को आइना दिखाना। पिछली सरकार की तरह इस लोकोक्ति को चरितार्थ ना करें। जय छत्तीसगढ़ का नारा बुलंद करना हर छत्तीसगढ़िया का कर्तव्य है।
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