ये घटना सूबे में हर समाचार पत्र या न्यूज वेब साइट और टीवी चैनल के माध्यम से परोसी जा चुकी है। रायगढ़ शहर के पूर्व विधायक प्रकाश नायक ने धान उपार्जन केंद्र पर जमकर हंगामा किया। इस दौरान उनके शराब के नशे में धुत रहने का भी जिक्र किया जा रहा है। इस मामले में पूर्व विधायक प्रकाश के साथ ही अन्य लोगों के खिलाफ शासकीय काम में बाधा पहुंचाने का मामला भी दर्ज किया जा चुका है। इस वीडियो में भी आवाज प्रकाश नायक की सुनाई दे रही है।

इस हंगामे के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया, बात पुलिस तक जा पहुंची। सियासत भी शुरू हो गई। जरा सुनिए मारपीट की घटना का जिक्र।
सवाल ये है कि क्या पूर्व विधायक प्रकाश शराब के नशे में धुत होकर धान उपार्जन केंद्र पहुंचे थे? ये तो तय है कि प्रकाश नायक ने उपार्जन केंद्र पर हंगामा किया। इतना भी तय है कि प्रकाश नायक के साथ उनके समर्थक मौजूद थे। अब अहम सवाल ये है कि क्या प्रकाश नायक धान की खरीद फरोख्त के लिए गए थे? क्या प्रकाश नायक धान उपार्जन केंद्र पर किसी तरह की वसूली कर रहे थे? प्रकाश नायक नशे की हालत में थे, तो प्रशासन के पास मेडिकल कराने का विकल्प भी तो मौजूद था। सुनिए प्रकाश नायक का पक्ष।

साहेब ये सियासत है, कल तक तो माननीय वित्त मंत्री ओपी चौधरी के वीडियो पर भी प्राथमिकी दर्ज करने की बात सामने आती रही। अब प्रकाश नायक की दबंगई और चरित्र पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रकाश नायक की दबंगई बतौर विधायक भी सामने आई होगी, लेकिन उस वक्त शायद सुर्खियां नहीं मिली होगी। उस वक्त सवाल सत्ता का रहा होगा। आज सत्ता बदल चुकी है। मीडिया ट्रायल कस्बाई पत्रकारिता में अरसे से शुमार है, नई बात नहीं।
खैर प्रकाश नायक गलत या सही ये तो कानून का मसला है… पर सवाल ये है कि मीडिया ट्रायल क्यों ? क्या ये कानूनन जायज है ?
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