बस्तर पहुंचा देवी लक्ष्मी का वाहन श्वेत उलूक, दुर्लभ बर्न आउल वन विभाग को सौंपा गया

बर्न आउल ने बस्तर में दस्तक दी है। जगदलपुर के एक स्कूल से इस पक्षी को पकड़ कर वन विभाग के हवाले किया गया है। इसे श्वेत उलूक के नाम से भी जाना जाता है।

Rare barn owl: सर्दी के मौसम में बस्तर में विदेशी पक्षी मौजूदगी दर्ज कराने लगे हैं। हिमालय के उत्तरी इलाके , इंडोनेशिया और प्रशांत द्वीप समूह में पाए जाने वाले बर्न आउल ने बस्तर में दस्तक दी है। जगदलपुर के एक स्कूल से इस पक्षी को पकड़ कर वन विभाग के हवाले किया गया है। इसे श्वेत उलूक या लक्ष्मी उलूक के नाम से भी जाना जाता है। इस पक्षी का सिर बड़ा होता है और मुंह का हिस्सा दिल सरीखा दिखता है। पौराणिक कथाओं में इसे देवी लक्ष्मी का वाहन करार दिया गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर को कुदरत ने पहाड़ियों और सघन जंगलों से नवाजा है। घाटी के इलाके में कई तरह के वन्य प्राणी और पक्षियों का बसेरा है। सर्दी के दिनों में इस इलाके में विदेशी पक्षी भी पहुंचते हैं। खासतौर पर कांगेरवैली नेशनल पार्क की आबोहवा वन्य प्राणियों और विदेशी पक्षियों को बेहद रास आती है। मौजूदा वक्त में बर्न आउल को वन विभाग ने अपनी देख-रेख में रखा है।

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